मेरी बेहेन की शादी की उम्र हो चुकी थी और अब वह दिखने में भी सुन्दर बन गयी थी। मेरी बेहेन के चुचो का अकार बहुत ही मोटा और छुपाये नहीं छिपता था। मम्मी भी मेरी बेहेन को देख बहुत डरती थी उसे कोई पकड़ ना ले।
पर मेरी बेहेन के मेरे लिए कुछ अलग ही विचार थे। हमारे घर में सभी लोग नए जमाने की सोच रखते थे जिसमे मम्मी ने हमें कहा था की अगर हम दोनों को कोई भी लड़का या लड़की पसंद है तो हम उन्हें बता सकते है।
हम इस वजह से घर में कुछ भी नहीं छुपाते थे और मम्मी पापा भी हम दोनों से बहुत ही अच्छे से पेश भी आते थे और सब एक दोस्त की तरह रहते थे। पर मेरी बेहेन इस चीज को कुछ अलग ही ले गयी।
नए जमाने के होने की वजह से मम्मी और पापा कई बार चुदाई करते थे जो की हम दोनों को ऊपर तक सुनाई देती थी। हम दोनों रात को देर तक जागते थे इसलिए मम्मी पापा की चुदाई की आवाज हम सुन लेते थे।
अब यह हमारे लिए कोई नयी बात नहीं थी पर आज की रात मेरी बेहेन ऊपर से उतर के निचे आयी और मुझ से पूछने लगी की मम्मी पापा की आवाज क्या मुझे भी सुनाई दे रही है।
शुरू में मेने बात टाल दी पर कुछ देर बाद आवाज आने के बाद मुझे हां करना पड़ा और मेरी बेहेन के पूछा यह मम्मी और पापा इस उम्र में भी यह चीजे क्यों करते है ?
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बेहेन ने राजी किआ मुझे चुदाई के लिए
इस बात का मुझ पर कोई जवाब नहीं था पर मेने अपनी बेहेन से कह दिआ की यह भी एक तरह का प्यार है जो हर किसी को करना चाहिए और यह अच्छा भी होता है। मेरी बेहेन के हँसा और कहा तो यह हम क्यों नहीं करते।
मै चौक गया और मेने कहा की यह वाला प्यार भाई बेहेन नहीं करते क्युकी उनमे यह अच्छा नहीं लगता। मेरी बेहेन ने बोला की नए जमाने में भाई बेहेन जैसा कुछ भी नहीं होता तो यह हम भी कर सकते है।
मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था पर मेरी बेहेन के ऐसा कहने पर मै बहक सा गया और मेने अपनी बेहेन के बारे में चुदाई का ख्याल सोचा और बात आगे बढ़ानी शुरू कर दी।
बेहेन से मेने कहा की यह बात तो ठीक है पर उसे यह सब अजीब लगेगा। मेरी बेहेन ने कहा की वह अब बड़ी भी हो चुकी है और उसके लिए कुछ भी करना अब अजीब नहीं होगा जिसमे प्यार हो।
मेने अपनी बेहेन को हां कहा और अब उसे अपने पास बिठा लिआ। अब मेने अपनी बेहेन से आंखे बंद करने को कहा और जैसे ही उसने आंखे बंद की मेने अपना लंड उसके हाथ में दे दिआ।
दीदी ने मुझ से पूछा की वह मोटा सा क्या है तो मेने कहा की इस चीज को उसे प्यार करना है जो की इस प्यार में शुरुआत का काम है। मेरी बेहेन ने अब लंड को सहलाना और हिलाना शुरू कर दिआ जिससे वह अच्छे से मोटा हो गया।
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बेहेन को किआ नंगा और चुत चुदाई का दिआ मजा
अब मेने अपना लंड बाहर निकाल लिआ और मेरी बेहेन ने आँखे खोल ली। वह मेरा लंड देख खुश थी और मेने अब उसे लंड की चुसाई करने के लिए कहा। दीदी ने मेरे लंड को अच्छे से चूसा और उसे थूक से गीला कर दिआ।
मेने भी अब अपनी बेहेन के कपडे खोलते हुए उसे नंगा कर दिआ और उसकी चुत पर अपनी जीभ से कुछ देर चटाई करि जिससे वह बहुत ज्यादा कामुक हो गयी आहे भरने लगी।
मेने दीदी के दोनों बूब्स भी जोर जोर से दबाये जिससे वह और भी गरम हो जाये और अब दीदी की चुदाई का समय आ गया था। मेने दीदी की चुत की दोनों पंखुडिओ को उंगलिओ से खोला और अपना लंड अंदर सरकाना शुरू किआ।
छेद तक लंड जाते ही मेने एक जोर के धक्के से दीदी की चुत में लंड घुसा डाला। दीदी के मुह्ह से जोर की आह्ह्ह्हह आयी और जो मेने हाथ से उसके मुह्ह को दबाके रोक लिआ और मेने धीरे धीरे चुदाई की रफ़्तार बढ़ानी शुरू कर दी।
कुछ ही देर में दीदी भी अब चुदाई का मजा लेने लग गयी और अच्छे से चुत मरवाने लगी। जोर जोर से मेरा लंड दीदी की चुत में अंदर बाहर हो रहा था और अब दीदी की चुत और मेरे लंड दोनों पर बहुत ग़िलापन आ गया था।
कुछ ही देर बाद मेने चुदाई की रफ़्तार और तेज कर दी और दीदी करहाते हुए चुत मरवाने लगी और मेरे लंड से अब वीर्य गिरना लगा जिसे मेने दीदी के मुह्ह में झाड़ दिआ और उन्हें पीला भी दिआ।
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